दुनिया के रंजोगम तक बदल गए फकत
उस चेहरे से अब भी उदासी नहीं जाती.
जज्बा -नवाजी का हुनर बदस्तूर जारी है
फाँकों में भी खाली कोई दिवाली नहीं जाती
समकालीन हिंदी कहानी, लैंगिक चेतना और 'थर्ड जेंडर' की संवेदना: दो कहानियों का तुलनात्मक अध्ययन कहानी की विकास यात्रा पर बात की जाए ...
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