दुनिया के रंजोगम तक बदल गए फकत
उस चेहरे से अब भी उदासी नहीं जाती.
जज्बा -नवाजी का हुनर बदस्तूर जारी है
फाँकों में भी खाली कोई दिवाली नहीं जाती
प्रियंका ओम की कहानी ‘ विगत की व्याधि’ : एक समीक्षात्मक आलोचना प्रियंका ओम को बहुत पहले से पढता-समझता आ रहा हूँ... और यकीन के साथ कह सक...
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