दुनिया के रंजोगम तक बदल गए फकत
उस चेहरे से अब भी उदासी नहीं जाती.
जज्बा -नवाजी का हुनर बदस्तूर जारी है
फाँकों में भी खाली कोई दिवाली नहीं जाती
बिगाड़ के डर से... (मलिक राजकुमार के उपन्यास 'स्टेशन मास्टर' का आलोचनात्मक मूल्यांकन) भारतीय उपन्यास साहित्य में देश-विभाजन एक ऐसा...
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