Tuesday, 11 October 2011
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बिगाड़ के डर से- प्रियंका ओम की कहानी ‘विगत की व्याधि’ : एक समीक्षात्मक आलोचना
प्रियंका ओम की कहानी ‘ विगत की व्याधि’ : एक समीक्षात्मक आलोचना प्रियंका ओम को बहुत पहले से पढता-समझता आ रहा हूँ... और यकीन के साथ कह सक...
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बिगाड़ के डर से… विकलांग विमर्श इतना भी आसान नहीं है... मेरे एक शिक्षक साथी ने एक किताब सुझाई और कहा— “सर , आपको यह महत्वपूर्ण किताब अ...
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बिगाड़ के डर से--- एकता व्यास की कहानी ‘स्लीपिंग पार्टनर’ यह कहानी अपने शीर्षक के कारण प्रथम दृष्टया पाठक को एक ऐसे भ्रम में डालती है, मान...
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जब मुझसे कोई पूछता है — “ आप कहानी कैसे लिखते हैं ?” तो मैं अकसर मुस्कुरा देता हूँ। क्योंकि कहानी लिखना मेरे लिए कि...
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