my thoughts: चंचल मना हो तुम देवी
आज मैं कह सकता हूँ
दुर्दि...: चंचल मना हो तुम देवी आज मैं कह सकता हूँ दुर्दिन में जो छोड़ो साथ कैसे सह सकता हूँ बिन तुम सखी कैसे रह सकता हूँ जीवन सपाट हो सके तो...
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
विभाजन से पारिवारिक विघटन तक की जीवनगाथा
बिगाड़ के डर से... (मलिक राजकुमार के उपन्यास 'स्टेशन मास्टर' का आलोचनात्मक मूल्यांकन) भारतीय उपन्यास साहित्य में देश-विभाजन एक ऐसा...
-
बिगाड़ के डर से… विकलांग विमर्श इतना भी आसान नहीं है... मेरे एक शिक्षक साथी ने एक किताब सुझाई और कहा— “सर , आपको यह महत्वपूर्ण किताब अ...
-
बिगाड़ के डर से--- एकता व्यास की कहानी ‘स्लीपिंग पार्टनर’ यह कहानी अपने शीर्षक के कारण प्रथम दृष्टया पाठक को एक ऐसे भ्रम में डालती है, मान...
-
जब मुझसे कोई पूछता है — “ आप कहानी कैसे लिखते हैं ?” तो मैं अकसर मुस्कुरा देता हूँ। क्योंकि कहानी लिखना मेरे लिए कि...
No comments:
Post a Comment