my thoughts: रिश्तों के बोझ से कब दबती है जिन्दगी
मुठ्ठी के र...: रिश्तों के बोझ से कब दबती है जिन्दगी मुठ्ठी के रेत सी निकलती है जिन्दगी ख्वाबों की आरज़ू में भटका हूँ दर- बदर किस ख्वाहिश में यूँ ...
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फेक आईडी नहीं, फेक इरादे
फेक आईडी नहीं , फेक इरादे सन्दीप तोमर किसी कार्यक्रम में एक महिला से मुलाकात हुई। औपचारिक-सी बातचीत हुई। जाते-जाते उन्होंने मुझसे कांटे...
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बिगाड़ के डर से… विकलांग विमर्श इतना भी आसान नहीं है... मेरे एक शिक्षक साथी ने एक किताब सुझाई और कहा— “सर , आपको यह महत्वपूर्ण किताब अ...
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भाषायी गरिमा को पछाड़ते शब्द आज एक मित्र से फोन पर बात हो रही थी , उन्होने किसी अजय की सोशल साइट पर लिखी एक पोस्ट का हवाला देकर कहा- “आपन...
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मेरे नाम में क्या गुनाह है मैं कोई दावा नहीं करता कि मैं कोई कहानीकार हूँ , कहानी लिखना और कहना एक कला है , ठीक वैसी ही कला जैसे कोई च...
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